किसी भी तरह से समस्या का हल बातचीत से निकाला जा सकता है। अच्छे ढंग से की गई बातचीत हर रिश्ते की नींव होती है। आप-अपने विचारों को कैसे व्यक्त करते हैं, इस से भी फर्क पड़ता है।
अगर आप बेहतर संवाद कर सकते हैं, तो आपके अपने साथी के साथ संबंध मजबूत होने की संभावना बढ जाती है। यहां हम आपको ऐसे ही 4 तरीके बताने वाले हैं, जो आपको अपने विचारों को व्यक्त करने में मदद करेंगे।
विश्वास के साथ रखें अपने विचार :
इस का मतलब यह नहीं है कि आप को इस तरह से पेश आना है कि आप किसी के साथ बिजनेस मीटिंग कर रहे हैं। ऐसे कभी भी न दर्शाएं कि कमरे में आपका ही अधिकार चल रहा है, बलि्क इस परिस्थिति में जितना ज्यादा हो सके, एकदम अनुकूल होकर अपना आत्मविश्वास दर्शाएं।
बीच-बीच में मुस्कुराते रहे और सावधानी से बोलें और किसी भी तरह न हिचकिचाएं। जितने ज्यादा सवाल कर सकें, करें या फिर अपनी बात कहते वक्त जरा सी अनिश्चितता दर्शाएं कि आप क्या कहना चाहते हैं। यदि आपके साथी को आपकी भावनाओं पर जरा भी शक होगा तो वह आपको बातों को गंभीरता से नहीं सुनेगा।
बॉडी लैंग्वेज पर दें ध्यान :
सकारात्मक बॉडी लैंग्वेज आपकी चर्चा को भी सकारात्मक बनाने में मददगार होती है। अपने साथी की आंखों में देखें और उस की ओर झुकाव रखें।
आप चाहें, तो संकेतों को दर्शाने के लिए अपने हाथों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। पर याद रहे कि इन्हें इतना ज्यादा भी हिला-हिलाकर बात न करें कि आप अपना नियंत्रण ही खो बेठै। अपने हाथों को अपनी छाती के सामने बांधकर न रखें, नहीं तो आपके साथी को लगने लगेगा कि आप पहले से अपना निर्णय ले चुके हैं।
सही ढंग से रखें बात :
कभी-कभी हम अपने साथी से उम्मीद करते हैं, कि वह हमारी बातों के पीछे छिपे हुए असल मतलब को समझे, पर इस सोच पर निर्भर रहना या इस की इच्छा भी रखना, सच में यह उचित नहीं है।
यह सोचने के बजाय आप अपने विचारों को सीधे तौर पर आपने साथी के सामने रखने की कोशिश करें। जब आप अपनी बात को रखेंगें तो अपनी बातों के अर्थ को समझाने के लिए कुछ उदाहरण भी दें ताकि आप की बोली जा रही बातों को आप का साथी सही मायने में समझ सके ।
साथी की जगह खुद को रखें :
किसी विशेष परिस्थिति में आप के साथी का क्या दृष्टिकोण होगा, यह जानने के लिए आप को पहले खुद को उस की जगह पर रखकर अपनी कल्पना शक्ति का इस्तेमाल करके ठीक उसी की तरह से सोचना पडेगा। इस बात से भी वाकिफ रहें कि हो सकता है, यहां पर कुछ ऐसी बातें भी हों, जिनके बारे में आपको कुछ भी जानकारी न हो।
जब वह बोल रहा हो, तो एक बार उस के नजरिए से भी सोचने की कोशिश करें। इस से आप को यह समझने में आसानी होगी कि आपका व्यवहार या परिस्थिति आप के साथी के कितना परेशान कर रही है और क्यों? जब आप गुस्से में हैं या दुखी हैं, तो बहस के अलावा कुछ सोच पाना आप के लिए बेहद मुशकिल होता है। पक यह तरकीब आप को समस्या का बहुत जल्दी ही समाधान देने में मददगार होता है।
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