विश्व मलेरिया दिवस, जानें क्यों हुई शुरूआत

पूरी दुनिया में कोरोना का कहर फैला हुआ है। इस बीच विश्व मलेरिया दिवस इस बात को याद दिलाता है कि दुनिया में बहुत सारी ऐसी बीमारियां हैं। जिनके कारण हर साल लोग बीमार रहते हैं और बाद में मौत के मुंह में समा जाते हैं। हर साल की तरह इस साल भी 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाया जा रहा है। इस दिवस की शुरूआत 2007 से की गई थी। यूनिसेफ ने इस दिन को शुरू किया था कि जिस से की लोगों का ध्यान इस खरतानाक बीमारी की ओर जाए। हर साल लाखों लोग इस से मर रहे थे। इस बार विश्व मलेरिया दिवस की थीम 'Zero malaria starts with me' है।

क्यों हुई शुरूआत :
इस विश्व मलेरिया दिवस की शुरूआत सब से पहले अफ्रीकी मलेरिया दिवस के रूप में की गई थी। इस का उद्देश्य अफ्रीका के देशों में होने वाली मौतों को कम करना था। परंतू अफ्रीकी स्तर पर आयोजित होने वाले मलेरिया दिवस को 2007 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी एक बैठक में विश्व मलेरिया दिवस के रूप में घेषित कर दिया है।
मलेरिया के कारण :
यह एक मच्छरों की एक प्रजाति मादा एनीफिलीज की होती है। जो प्लाजमोडियम परजीवी के कारण हो जाता है जिस से यह मच्छर संक्रमित होते हैं। कई सारे प्लाजमोडियम परजीवियों में से केवल 5 तरह के परजीवी इंसानों में मलेरिया फैलाते हैं। जिनमें से प्लाजमोडियम फाल्सीपेरम पूरी दुनिया भर में ज्यादातर होने वाली मौते के लिए जिम्मेदार होते हैं। अफ्रीका के देशों में सबसे ज्यादा इन्हीं मच्छरों के कारण मलेरिया होता है।
सुरक्षा के उपाय :
मलेरिया के लक्षण आम तौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के 10-15 दिन के बाद दिखाई देने लगते हैं। जिस के शुरूआती लक्षण बुखार, सिरदर्द और शरीर में ठंड लगना आदि है। मलेरिया से बचने का सब से बेहतर तरीका है कि मच्छरदानी का उपयोग और इनडोर अवशिष्ट छिड़काव का उपयोग।


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